आखिर क्यों ट्रम्प द्वारा शरणार्थियों पर लगाया गया प्रतिबंध एक सही दिशा में उठाया गया कदम है।

जिन देशों ने आज़ाद मुल्कों पर बम बरसा के करोड़ों लोगों को शरणार्थी बनाया, वो ही देश आज शरणार्थियों के हमदर्द होने का नाटक रच रहे हैं। अगर फ़्रांस को शरणार्थियों से इतनी ही हमदर्दी है तो फ़्रांस ने लीबिया पर बम क्यों बरसाये? अगर डेमोक्रेट्स को इतनी ही हमदर्दी है इन शरणार्थियों से तो इनके मुल्कों पर बम बरसा के इन्हें शरणार्थी बनाया ही क्यों?

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पश्चिमी देशों के बड़े बड़े कर्पोर्टेस को सस्ते मज़दूर चाहिए, इसलिए ये इन शरणार्थियों को अपने देश में घुसने दे रहे हैं जहाँ इनसे बंधुआ मज़दूरों की तरह व्यव्हार किया जाता है। तो शरणार्थियों से कोई लगाव नहीं है इन पश्चिमी मुल्कों को बल्कि ये उन शरणार्थियों का शोषण करना चाहते हैं इसलिए ये नाटक रचा जा रहा है। तो सवाल यह नहीं है कि शरणार्थियों की हिमायत कौन कर रहे हैं, बल्कि सवाल यह है कि इन्हें शरणार्थी बना कौन रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बार बार ये कह रहे हैं कि अमरीकी लोगों के लिए नौकरी पैदा करना उनका मकसद है और अमरीका की लेबर क्लास को मजबूत करना उनका उद्देश्य है इसलिए वो शरणार्थियों को अपने देश नहीं आने दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बड़े बड़े  अमरीकी कॉर्पोरेट घराने अपने निजी स्वार्थ के लिए सस्ते से सस्ते मज़दूर चाहते हैं इसलिए वो अपना ज्यादातर बिजनेस किसी दूसरे मुल्क में ट्रांसफर कर देते हैं जहाँ सस्ते से सस्ते मज़दूर उपलब्ध होते हैं, ट्रम्प बिज़नेस के इसी मॉडल को रोकने की कोशिश कर रहे हैं इसलिए वो ये सब कर रहे हैं। ट्रम्प के इस कदम से कॉर्पोरेट घरानों को सबसे ज्यादा नुकसान होने वाला है इसलिए वो अपने द्वारा नियंत्रित मीडिया और तथाकथित एक्सपर्ट्स के द्वारा ट्रम्प विरोधी अभियान चलवा रहा है। हमारे भारत के ज्यादातर तथाकथित एक्सपर्ट्स की स्थिति तो इस से भी बुरी है, वो सिर्फ पश्चिमी मीडिया और एक्सपर्ट्स के द्वारा लिखे हुए लेखों को हिंदी में ट्रांसलेट करने का काम मात्र करते हैं और फिर अपने आप को एक्सपर्ट्स कहते हैं। ट्रम्प के यह कदम वैश्वीकरण के खिलाफ बड़े कदम साबित होंगे, असल में ये वैश्वीकरण विरोधी नीतियां है। ट्रम्प ने अपने पहले भाषण में ही कहा कि “द अमरीकन कार्नेज स्टॉप्स राईट हियर एंड राईट नाउ”, इसके दोनों अर्थ हैं। पहला ये है कि अब अमरीकी लोगों को रोजगार देने के लिए काम किया जायेगा, बड़े बड़े कर्पोर्टेस को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं और दूसरा अर्थ ये है कि अब अमरीका दूसरे देशों में अपनी हस्तक्षेप की नीतियों पर रोक लगायेगा। अब सवाल ये है कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प अपनी कही हुई इन दोनों बातों पर रुकेंगे या बाद में पलटी मार जायेंगे। अगर वो दूसरे देशों में अमरीकी हस्तक्षेप पर भी रोक लगाते हैं जैसा उन्होंने कहा है और शरणार्थियों पर भी रोक लगाते हैं तो वे उनकी स्वागत योग्य पहल है जिसका हम सब को स्वागत करना चाहिए। ट्रम्प से पहले वाले अमरीकी राष्ट्रपतियों ने अनेक देशों पर बम बरसाये और करोड़ों लोगों को बेघर कर दिया, अब अगर ट्रम्प इस पर रोक लगाने में कामयाब हो जाते हैं तो ये वैश्वीकरण के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी जीत साबित होगी। अगर दूसरे देशों में पश्चिमी हस्तक्षेप पर ही रोक लग जाएगी तो शरणार्थी बनने ही बन्द हो जायेंगे और सारी दुनिया अमन चैन के साथ रह सकेगी।

Abhimanyu Kohar

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